संपादकीय

हरदा कांड पर मुख्यमंत्री की कार्रवाई—देर से, मगर दिशा में सही कदम

हरदा कांड पर मुख्यमंत्री की कार्रवाई—देर से, मगर दिशा में सही कदम

 

13 जुलाई को हरदा जिले के राजपूत छात्रावास में हुए लाठीचार्ज और पुलिसिया कार्रवाई के बाद अब जाकर सरकार ने जिम्मेदार अफसरों पर बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के आदेश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, एसडीएम और एसडीओपी को तत्काल प्रभाव से जिले से हटा दिया गया है। कोतवाली थाना प्रभारी और ट्रैफिक थाना प्रभारी को भी नर्मदापुरम आईजी कार्यालय अटैच कर दिया गया है। सरकार का यह कदम प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश देता है—लेकिन यह सवाल भी छोड़ जाता है कि यह कदम पहले क्यों नहीं उठाया गया?

 

घटना के दिन छात्रावास में रह रहे छात्रों के साथ जिस प्रकार से पुलिस ने अनुचित बल प्रयोग किया, और फिर प्रशासन ने स्थिति को संवेदनशीलता से संभालने की बजाय लापरवाही दिखाई, उससे सरकार की नीयत पर सवाल उठे। क्या यह लाठीचार्ज टाला नहीं जा सकता था? और यदि नहीं, तो कम से कम बाद में पुलिस-प्रशासन ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए माफी या संवाद की पहल क्यों नहीं की?

 

यह कोई पहला मौका नहीं है जब छात्रावास या सामाजिक संस्थानों में रह रहे युवाओं पर बल प्रयोग हुआ हो। दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि अक्सर ऐसे मामलों में जांच के नाम पर समय बीत जाता है और कार्रवाई महज दिखावे की बनकर रह जाती है। इस बार मुख्यमंत्री ने त्वरित जांच और प्रभावी कार्रवाई का दावा किया है—यह सराहनीय है। मगर यह भी सच है कि यह कदम जनदबाव और सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया के बाद ही संभव हो सका। अगर सरकार संवेदनशीलता और जवाबदेही को प्राथमिकता में रखती, तो शायद यह स्थिति ही उत्पन्न नहीं होती।

 

प्रशासनिक अमले में जवाबदेही तय करने का यह उदाहरण आने वाले समय में एक केस स्टडी हो सकता है, लेकिन यह तभी सार्थक होगा जब इसे एक isolated action की बजाय व्यापक सुधार की दिशा में देखा जाए। ज़रूरत है कि पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को कानून के साथ-साथ मानवीय व्यवहार और सामाजिक समझ का भी प्रशिक्षण दिया जाए—खासकर तब, जब वे विद्यार्थियों, महिलाओं या समाज के संवेदनशील वर्गों से जुड़ी किसी स्थिति को हैंडल कर रहे हों।

 

अंततः यह उम्मीद की जानी चाहिए कि हरदा जैसी घटनाएं दोबारा न हों। और अगर हों, तो कार्रवाई “सिर्फ तब” न हो जब वीडियो वायरल हो या जनआक्रोश सड़कों पर उतर आए। सरकार को proactive होना होगा, reactive नहीं।

 

संपादकीय टीम, विशाल समाचार

 

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