पूणे

संविधान के मार्गदर्शक सिद्धांतों पर आधारित समाज निर्माण के लिए एट्रोसिटी कार्यशाला उपयोगी – महासंचालक सुनील वारे

संविधान के मार्गदर्शक सिद्धांतों पर आधारित समाज निर्माण के लिए एट्रोसिटी कार्यशाला उपयोगी –  महासंचालक सुनील वारे

— डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान (बार्टी), पुणे

 

पुणे:  समाज में समरसता बनाए रखने के लिए महापुरुषों के विचारों का स्मरण करते हुए तथा संविधान के मार्गदर्शक सिद्धांतों पर आधारित समाज निर्माण के उद्देश्य से एट्रोसिटी कार्यशाला अत्यंत उपयोगी है, ऐसा प्रतिपादन डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान (बार्टी) के महासंचालक श्री सुनील वारे ने किया।

 

यह एकदिवसीय कार्यशाला अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 एवं संशोधित अधिनियम 2016 के अंतर्गत, सामाजिक न्याय और विशेष सहायता विभाग के मार्गदर्शन में बार्टी, पुणे और सहायक आयुक्त, समाज कल्याण विभाग, पुणे के संयुक्त तत्वावधान में जिलाधिकारी कार्यालय के बहुउद्देश्यीय सभागृह में आयोजित की गई।

 

इस अवसर पर पुणे शहर की सहायक पुलिस आयुक्त अनुराधा उदमले, पिंपरी-चिंचवड़ के सहायक पुलिस आयुक्त बाळासाहेब कोपनर, उपविभागीय पुलिस अधिकारी तानाजी बरडे, विशेष जिला समाज कल्याण अधिकारी राधाकिसन देवडे, सहायक आयुक्त समाज कल्याण विशाल लोंढे प्रमुख रूप से उपस्थित थे।

 

महासंचालक श्री वारे ने कहा कि बार्टी द्वारा समाज कल्याण के उद्देश्य से समय-समय पर विविध कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। जातीय समरसता और समाज के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए यह कार्यशाला आयोजित की गई है। उन्होंने कहा कि एट्रोसिटी अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन, शासकीय अधिकारियों, विधिज्ञों और आम नागरिकों को इस अधिनियम से जुड़ी व्यावहारिक कठिनाइयों का समाधान खोजने हेतु यह कार्यशाला सहायक सिद्ध होगी।

 

उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता, समानता और बंधुता जैसे संवैधानिक मूल्यों के क्रियान्वयन से कई देशों ने उल्लेखनीय प्रगति की है और भारत भी इसी दिशा में कदम बढ़ा सकता है। बार्टी द्वारा हाल ही में राष्ट्रीय एट्रोसिटी हेल्पलाइन शुरू की गई है ताकि पीड़ितों को शीघ्र न्याय मिल सके।

 

उन्होंने यह भी कहा कि सामाजिक न्याय विभाग के माध्यम से प्रत्येक जिले में ऐसी कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं, जिनमें लंबित एट्रोसिटी प्रकरणों के त्वरित निपटारे का प्रयास किया जा रहा है। समाज में अन्याय के शिकार लोगों की समस्याओं के समाधान हेतु सभी विभागों को एक साथ आकर साझा प्रयास करने की आवश्यकता है।

 

श्री वारे ने कहा कि महाराष्ट्र देश का एक प्रगतिशील राज्य है और यहां अनुसूचित जातियों एवं जनजातियों पर कोई अन्याय या अत्याचार न हो, इसके लिए विभाग द्वारा समय-समय पर अनेक योजनाएं लागू की जाती हैं, जिनसे समाज को लाभ मिल रहा है।

 

कार्यशाला के दौरान विविध विषयों पर विशेषज्ञ वक्ताओं द्वारा मार्गदर्शन किया गया। सामाजिक कार्यकर्ता सुभाष केकाण ने एट्रोसिटी अधिनियम की पृष्ठभूमि पर, अतिरिक्त सरकारी अभियोक्ता मिलिंद दातरंगे ने न्यायालयीन प्रक्रिया पर, सहायक सरकारी वकील जावेद खान ने न्यायिक प्रक्रिया पर तथा विशेष सरकारी वकील अमोल सोनवणे ने सामाजिक समरसता के विषय पर अपना मार्गदर्शन दिया।

 

कार्यक्रम का प्रास्ताविक सहायक आयुक्त (समाज कल्याण) श्री विशाल लोंढे ने प्रस्तुत किया और कार्यशाला के उद्देश्य एवं प्रयोजन की विस्तृत जानकारी दी। कार्यशाला की शुरुआत संविधान की उद्देशिका के वाचन से हुई। इस कार्यशाला में पुलिस, राजस्व, समाज कल्याण विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि तथा पदाधिकारी उपस्थित थे।

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