
राजर्षि शाहू महाराज: सामाजिक लोकतंत्र के आधारस्तंभ — मा. राजाराम जी
महापुरुषों के विचारों का सच्चा उत्तराधिकारी है बहुजन समाज पार्टी
महाराष्ट्र/कोल्हापुर: 151वीं जयंती के पावन अवसर पर देश के सामाजिक परिवर्तन के अग्रदूत, वंचितों एवं शोषितों के सशक्तकर्ता राजर्षि छत्रपति शाहू महाराज की स्मृति में बहुजन समाज पार्टी (बसपा), पश्चिम महाराष्ट्र ज़ोन की ओर से “राजर्षि शाहू महोत्सव” का भव्य आयोजन इर्विन मल्टीपर्पज सभागृह, कोल्हापुर में संपन्न हुआ। इस अवसर पर भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम, ऐतिहासिक पोवाड़े और पारंपरिक मर्दानी खेलों के माध्यम से शाहू महाराज के विचारों और कार्यों को जनसामान्य तक पहुँचाने का प्रयास किया गया।

महोत्सव से पूर्व शहर में निकाली गई कार रैली ने शाहूनगरी को बसपा के रंग में रंग दिया। जगह-जगह पर बसपा कार्यकर्ताओं द्वारा लड्डुओं का वितरण कर जनता को इस आयोजन से जोड़ा गया।माल्यार्पण और श्रद्धांजलि कार्यक्रम:
दिन की शुरुआत महामानव महात्मा ज्योतिबा फुले और भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की प्रतिमाओं पर बहुजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय समन्वयक, महाराष्ट्र प्रदेश के मुख्य प्रभारी तथा पूर्व सांसद माननीय राजाराम जी द्वारा माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए हुई। इसके पश्चात प्रातः 10:30 बजे शाहू महाराज की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की गई।
शाहू महाराज द्वारा स्थापित ‘मिस क्लार्क छात्रावास’ में बहुजन नायिका सुश्री बहन मायावती जी द्वारा प्रदान की गई निधि से निर्मित शिलालेख का भी अनावरण मा. राजाराम जी के कर-कमलों द्वारा संपन्न हुआ।
मुख्य समारोह की सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ:

इर्विन सभागृह में आयोजित मुख्य समारोह में सुप्रसिद्ध गायिका निशा भगत और गायक विशाल द्वारा प्रस्तुत भीम गीतों ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। इसके अतिरिक्त, दयानंद मेटकर की टीम द्वारा फुले-शाहू-आंबेडकर के जीवन चरित्र पर आधारित प्रेरक मंचन प्रस्तुत किया गया।
नागपुर से पधारी कलाकार ने सुश्री मायावती जी के स्वरूप में भावाभिनय कर उपस्थितजनों को चकित कर दिया। कार्यक्रम में प्रस्तुत पारंपरिक पोवाड़े और मर्दानी खेलों ने सभा को ऊर्जा से भर दिया।
प्रमुख वक्तव्य: मा. राजाराम जी ने अपने मुख्य संबोधन में मा. राजाराम जी ने कहा:
“राजर्षि शाहू महाराज ने समाज की वंचित, पीड़ित और उपेक्षित जातियों के उत्थान के लिए शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सम्मान सुनिश्चित करने का कार्य किया। वे एक सच्चे लोकनायक थे। आज उनके विचारों का वास्तविक उत्तराधिकारी केवल बहुजन समाज पार्टी है, जो सामाजिक न्याय की स्थापना के लिए प्रतिबद्ध है।”उन्होंने कहा कि:
> “शाहू महाराज ने सत्ता को लोकसेवा का माध्यम बनाया। डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने उन्हें ‘सामाजिक लोकतंत्र का आधारस्तंभ’ की संज्ञा दी थी। इस गौरव दिवस को पूरे समाज को जोड़ते हुए मनाना, हमारी ऐतिहासिक जिम्मेदारी है। आगामी स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के चुनाव में मतदाता बसपा को समर्थन देकर सामाजिक न्याय विरोधी ताकतों को पराजित करें।”
एडवोकेट सुनील डोंगरे (प्रदेशाध्यक्ष, बसपा):

“महाराष्ट्र में छत्रपति शाहू महाराज की जयंती को ‘सामाजिक न्याय दिवस’ के रूप में मनाया जाना बसपा की ऐतिहासिक भूमिका का परिणाम है। बहन मायावती जी ने उत्तर प्रदेश के कानपुर विश्वविद्यालय का नामकरण शाहू महाराज के नाम पर किया, अमेठी का नाम ‘छत्रपति शाहू महाराज नगर’ रखा, जिसे बाद में समाजवादी सरकार ने बदल दिया। बहुजन महापुरुषों को उचित सम्मान केवल बसपा ही दे सकती है।”
डॉ. हुलगेश चलवादी ने कहा:
“बहुजन समाज पार्टी की विचारधारा फुले, शाहू और आंबेडकर के सामाजिक न्याय के सिद्धांतों पर आधारित है। आरक्षण की मूल भावना और उसका सतत समर्थन बसपा के सिद्धांतों में शामिल है। सामाजिक समानता, शिक्षा और प्रतिनिधित्व बहुजन समाज पार्टी के संघर्ष का मूल केंद्र है।
कार्यक्रम में प्रमुख उपस्थिति:
पश्चिम महाराष्ट्र पुणे ज़ोन प्रभारी रामचंद्र जाधव, अप्पासाहेब लोकरे, ऍड. संजीव सदाफुले, किरण आल्हाट, कोकण ज़ोन प्रभारी व कोल्हापुर ज़िला अध्यक्ष रविंद्र कांबळे, पुणे ज़िला अध्यक्ष अशोक गायकवाड, सातारा ज़िला अध्यक्ष लहरीदास कांबळे, अहमदनगर ज़िला अध्यक्ष सुरेश कांबळे, सोलापुर ज़िला अध्यक्ष बबलू गायकवाड, सातारा के श्री. थारोडे, मुकुंद सोनावणे, सुनील शिंदे, राजेश चव्हाण, मनिष कावळे, बामसेफ के रवींद्र चहांदे, अशोक रामटेके सहित राज्यभर से आए हज़ारों पदाधिकारी, कार्यकर्ता और हितचिंतक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

समापन टिप्पणी:
पूरे महाराष्ट्र में और विशेषतः कोल्हापुर की भूमि पर, छत्रपति शाहू महाराज के विचारों की गूंज आज भी जीवित है। बसपा उन विचारों को केवल स्मरण नहीं करती, बल्कि उनके सामाजिक क्रांतिकारी उद्देश्यों को आज के संदर्भ में लागू करने के लिए सक्रिय भूमिका निभा रही है। यह महोत्सव सामाजिक समरसता और न्याय की दिशा में एक सशक्त प्रयास था।



