
योग एक वैश्विक आंदोलन बन चुका है जो धार्मिक और राष्ट्रीय सीमाओं से परे है — गुरुजी शिवम
एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी में 11वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया
पुणे डीएस तोमर:एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी (MIT-WPU) के कोथरुड स्थित परिसर में आज 11वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर एक भव्य योग महोत्सव का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य “एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य हेतु योग” थीम को जन-जन तक पहुँचाना रहा।
योग दिवस के अवसर पर गुरुजी शिवम ने अपने विचार रखते हुए कहा कि “योग साधना आत्मचिंतन और अंतरमन की यात्रा का माध्यम है। आज के दौर में, जब पूरा विश्व जलवायु परिवर्तन, संक्रमणजन्य रोगों और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से जूझ रहा है, योग मानसिक शांति, शारीरिक स्वास्थ्य और पर्यावरणीय जिम्मेदारी की भावना को प्रबल करता है। योग आज धार्मिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय सीमाओं से परे एक वैश्विक आंदोलन बन चुका है।”

कार्यक्रम की गरिमामयी उपस्थिति में विश्वधर्मी प्रा. डॉ. विश्वनाथ दा. कराड, एमआईटी-डब्ल्यूपीयू के कार्याध्यक्ष राहुल विश्वनाथ कराड के मार्गदर्शन में यह आयोजन सम्पन्न हुआ।
इस अवसर पर एमआईटी-डब्ल्यूपीयू के कुलगुरु डॉ. आर.एम. चिटणीस, कुलसचिव गणेश पोकळे, माईर्स के रजिस्ट्रार डॉ. रत्नदीप जोशी, तथा स्कूल ऑफ पीस स्टडी के अधिष्ठाता प्रा. डॉ. मिलिंद पात्रे उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में सैकड़ों शिक्षक व शिक्षकेत्तर कर्मचारियों ने भाग लिया, जिन्हें योग प्रशिक्षकों द्वारा योग के विभिन्न आसनों व ध्यान की विधियों का अभ्यास कराया गया।

प्रा. डॉ. विश्वनाथ दा. कराड ने अपने संबोधन में कहा, “योग केवल आसनों का अभ्यास नहीं बल्कि जीवन जीने की कला है। यह सिखाता है कि जीवन कैसे जिया जाए और क्या नहीं किया जाना चाहिए। योग से नम्रता, शील और आत्मसम्मान का विकास होता है। शरीर को जंग लगने देने से बेहतर है उसे क्रियाशील बनाए रखना — इसके लिए नियमित योग आवश्यक है। आज दुनिया को जिस शांति की आवश्यकता है, वह केवल ध्यान और साधना से संभव है। एमआईटी में स्थापित आध्यात्मिक प्रयोगशाला को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने की आवश्यकता है।”
डॉ. आर.एम. चिटणीस ने अपने प्रास्ताविक भाषण में बताया कि “एमआईटी ही एकमात्र ऐसी संस्था है जहाँ नियमित रूप से योग अभ्यास होता है और यहाँ अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन प्रतिवर्ष व्यापक स्तर पर किया जाता है। अब हमें इसे और विस्तार देना है।”
कार्यक्रम का संचालन प्रा. डॉ. शालिनी टोंपे ने कुशलता से किया।


