
अनिल अग्रवाल ने चांदी को बताया नए दौर में निवेश का सुरक्षित माध्यम और इनोवेशन को बढ़ावा देने वाला मुख्य धातु
पुणे: हाल ही में सोशल मीडिया पोस्ट में वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने आज के बदलते वैश्विक परिवेश में चांदी के बढ़ते सामरिक एवं निवेश महत्व पर ज़ोर दिया। पारम्परिक रूप से निवेश के लिए सुरक्षित माने जाने वाले असेट्स से तुलना करते हुए उन्होंने कहा ‘‘हम जानते हैं कि इतिहास में अनिश्चित समय में यूएस डॉलर और सोना निवेशकों के लिए सुरक्षित विकल्प रहे हैं। हालांकि आज की अप्रत्याशित दुनिया में, जहां डॉलर पूरी तरह तरह से सुरक्षित नहीं है और सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर हैं, ऐसे में चांदी निवेशकों के लिए निवेश का सुरक्षित माध्यम बन रहा है।
चांदी की कीमतें 13 साल के सर्वोच्च स्तर 37 डॉलर प्रति आउंस पर पहुंच गई हैं। इसका कारण न सिर्फ मांग बढ़ना है और साथ ही उभरती तकनीकों जैसे सोलर सैल, आर्टीफिशियल इंटेलीजेन्स, नैनोटेक्नोलॉजी, एरोस्पेस में चांदी की बढ़ती भूमिका भी है
श्री अग्रवाल ने भारत के युवा उद्यमियों एवं ज्वैलरी डिज़ाइनों से आह्वान किया है कि उन्हें सोने के व्यवहारिक एवं फैशनेबल विकल्प के रूप में चांदी की क्षमता को समझना चाहिए। ‘‘चांदी के आभूषणों में भी सोने से प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता है। ऐसे में युवा डिज़ाइनरों एंव स्टार्टअप्स के लिए चांदी में निवेश के अच्छे अवसर हैं।’ उन्होंने कहा।
वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल लम्बे समय से चांदी के लिए भारत की आयात पर निर्भरता कम करने के पक्ष में रहे हैं, वे इसकी मूल्य श्रृंखला को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। वेदांता की सब्सिडरी, हिंदुस्तान ज़िंक दुनिया में चांदी के पांच टॉप उत्पादकों में से एक है, जो वर्तमान में भारत की चांदी की 10 फीसदी मांग को पूरा करने में योगदान दे रही है। आने वाले समय में वेदांता ने क्षमता विस्तार द्वारा अपने चांदी आउटपुट को दोगुना कर 1500 टन तक पहुंचाने की योजना बनाई है।
अपनी बात को समाप्त करते हुए श्री अनिल अग्रवाल ने कहा, ‘‘आज, जो भी चीज़ चमकती है, वह सिर्फ सोना नहीं बल्कि बड़े पैमाने पर चांदी भी है।’


