पूणे

दि विश्वेश्वर सहकारी बैंक को मिला ‘शेड्युल्ड बैंक’ का दर्जा

दि विश्वेश्वर सहकारी बैंक को मिला ‘शेड्युल्ड बैंक’ का दर्जा

 

पुणे:  पुणे में वर्ष 1972 में स्थापित दि विश्वेश्वर सहकारी बैंक को 27 मई 2025 को भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा ‘शेड्युल्ड बैंक’ का दर्जा प्रदान किया गया है। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि की जानकारी आज बैंक के अध्यक्ष श्री अनिल गाडवे ने आयोजित पत्रकार वार्ता में दी। इस अवसर पर बैंक के उपाध्यक्ष श्री राजेंद्र मिरजे और मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री श्रीराम आपटे भी उपस्थित थे।

 

दि विश्वेश्वर सहकारी बैंक शहरी सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में सबसे तेज़ी से प्रगति करने वाली बैंकों में से एक है। वर्ष 2011 में कर्नाटक राज्य के निपाणी स्थित ‘दि निपाणी अर्बन सौहार्द सहकारी बैंक’ का विलय कर बैंक ने मल्टी-स्टेट सहकारी बैंक का दर्जा प्राप्त किया था। अब बैंक को ‘शेड्युल्ड बैंक’ का दर्जा भी प्राप्त हो गया है।

 

वर्तमान में भारत में 31 मार्च 2025 तक कुल 1463 शहरी सहकारी बैंक हैं, जिनमें से केवल 49 बैंकों को ‘शेड्युल्ड’ का दर्जा प्राप्त था। विश्वेश्वर बैंक के साथ यह संख्या 50 हो गई है। पुणे में यह दर्जा 33 वर्षों के बाद किसी बैंक को मिला है तथा यह शहर की तीसरी शेड्युल्ड बैंक बन गई है।

 

शेड्युल्ड बैंक का दर्जा प्राप्त करने के लिए बैंक की नेट डिमांड और टाइम लाइबिलिटीज (यानी कुल जमा) ₹1000 करोड़ से अधिक होनी चाहिए। इसके अलावा, रिजर्व बैंक के कड़े मानकों और कई जांच प्रक्रियाओं में बैंक को खरा उतरना होता है। दि विश्वेश्वर सहकारी बैंक ने वर्ष 2011 में आवेदन किया था और 15 अलग-अलग जांचों में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन और नियमों का पालन करते हुए यह सम्मान प्राप्त किया है।

बैंक की वित्तीय प्रगति (31 मार्च 2023 से 31 मार्च 2025 तक):

जमा राशि: ₹1743.86 करोड़ (2023) से बढ़कर ₹2230.52 करोड़ (2025)

ऋण: ₹1141.28 करोड़ (2023) से बढ़कर ₹1538.35 करोड़ (2025)

कुल कारोबार: ₹2885.14 करोड़ (2023) से बढ़कर ₹3768.87 करोड़ (2025)

 

शेयर पूंजी: ₹45.48 करोड़ (2023) से बढ़कर ₹61.30 करोड़ (2025)

पूंजी पर्याप्तता अनुपात (CRAR): 16.25% (2023), 15.13% (2025)

ऑडिट वर्ग: लगातार तीन वर्षों तक ‘A’

सदस्य संख्या: 23,705 (2023) से बढ़कर 30,136 (2025)

 

शाखाएं: 28 (2023) से बढ़कर 30 (2025)

 

डिविडेंड: लगातार तीन वर्षों तक 10%

बैंक को लगातार ‘A’ श्रेणी का ऑडिट मिला है और RBI के “Financially Sound and Well Managed” (FSWM) मानकों का पालन किया है।

शेड्युल्ड बैंक बनने के फायदे:

रिजर्व बैंक से रिफाइनेंस सुविधा

बैंक गारंटी का बड़ा व्यवसाय

टेलीग्राफिक ट्रांसफर, मनी ट्रांसफर, डिमांड ड्राफ्ट जैसी सुविधाएं

सरकारी, अर्ध-सरकारी, धर्मार्थ संस्थाओं से जमा स्वीकारने की अनुमति

हायर पर्चेज लोन की सुविधा

विदेशी बैंकों के साथ व्यापार, आयात-निर्यात सेवाएं

लेटर ऑफ क्रेडिट, ऑनलाइन और मोबाइल बैंकिंग सुविधा

पूंजी वृद्धि के लिए दीर्घकालिक जमा और बॉन्ड जारी करने की सुविधा

 

मर्चेंट बैंकिंग सेवाएं

 

राष्ट्रीयकृत बैंकों की तरह बैंक गारंटी जारी करने की सुविधा,रेरा खाते खोलने की अनुमति

 

इन सुविधाओं के साथ-साथ शेड्युल्ड बैंकों को कुछ अतिरिक्त जिम्मेदारियां भी निभानी होती हैं, जैसे कि नकद आरक्षित अनुपात (CRR) रिजर्व बैंक के पास रखना और समय-समय पर विस्तृत जानकारी प्रस्तुत करना।

दि विश्वेश्वर सहकारी बैंक के संस्थापक अध्यक्ष स्व. नामदेवराव रुकारी, स्व. भरतशेठ गाडवे, स्व. बाबूराव हरपळे-पाटील और उनके सहयोगियों ने 7 नवंबर 1972 को बैंक की स्था

पना की थी। आज बैंक की 30 शाखाएं महाराष्ट्र और कर्नाटक में

 

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