
प्रधान पर नाम बदलकर चुनाव लड़ने के आरोपी पर कार्यवाही कब जिला प्रशासन मौन क्यों.? जबाव दें जिलाधिकारी
डीएस तोमर मुख्य संवाददाता
इटावा जनपद के चकरनगर तहसील में हलफनामा पर एक युवक ने विकास खंड की ग्राम पंचायत खिरीटी के प्रधान पर प्रशासन को गुमराह कर दूसरे नाम से प्रधान बनने का आरोप लगाते हुए एसडीएम से जांच कर कार्रवाई की मांग की थी । एसडीएम ने टीम गठित कर जांच कराने का आश्वासन दिया है।
जिला प्रशासन के अधिकारियों द्वारा प्रार्थना पत्र को ठंडे फ्रीजर में रख दिया गया? क्यों कि आंखें गर्मी का सीजन आने वाला हैं।कही मुद्दा गर्म न हो जाये इस लिए जिला प्रशासन के अधिकारियों ने उसे ठंडे फ्रीजर में रखना उचित समझा?
मामला इस प्रकार है खिरीटी निवासी अमित कुमार तिवारी पुत्र प्रमोद कुमार ने 25 जनवरी को एसडीएम चकरनगर ब्रह्मानंद सिंह कठेरिया को हलफनामा पर शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि पंचायत का वर्तमान ग्राम प्रधान राहुल देव नाम से प्रधानी कर रहा है, जबकि 2015 में उक्त प्रधान संजीव कुमार पुत्र देवी दयाल के नाम से चुनाव लड़ा था, तो आखिर इसका सही नाम कौन सा है। आरोप लगाया कि ग्राम प्रधान ने फर्जी तरीके से नाम परिवर्तन करके चुनाव जीता है। नाम में फेरबदल करके फर्जीवाड़ा किया है। शिकायतकर्ता ने हलफनामा के माध्यम से यह भी बताया की ग्राम
प्रधान का स्टेट बैंक चकरनगर में संजीव कुमार के नाम से जबकि सेंट्रल बैंक चकरनगर की शाखा में राहुल देव के नाम से खाता संचालित है। उन्होंने बताया कि उक्त ग्राम प्रधान की पत्नी का नाम आज भी पंचायत निर्वाचन की मतदाता सूची संख्या 137 पर सोनी पत्नी संजीव कुमार नाम अंकित है। ग्राम प्रधान ने 2015 में संजीव कुमार पुत्र देवी दयाल के नाम से चुनाव लड़ा था, जो पंकज कुमार से चुनाव हार गया था।
एसडीएम ने जांच कराने का दिया भरोसा 2015 में संजीव व 2021 में राहुल के नाम से लड़ा था चुनाव
उपजिलाधिकारी ब्रह्मानंद कठेरिया को ज्ञापन दिया अमित ने.
उन्होंने एसडीएम से जांच कर फर्जीवाड़ा करने वाले ग्राम प्रधान के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। एसडीएम ने डीपीआरओ को आरोप पत्र भेजते हुए जांच करने के बाद कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है। एसडीएम ने बताया कि खिरीटी ग्राम प्रधान पर नाम बदलकर प्रधानी जीतने का आरोप लगाया है। इसकी जांच कराई जाएगी। ग्राम प्रधान खरीटी राहुल देव ने इस संबंध में कुछ भी कहने से इन्कार कर दिया।
जिला प्रशासन के अधिकारियों द्वारा प्रार्थना पत्र को ठंडे फ्रीजर में रख दिया गया? क्यों कि आंखें गर्मी का सीजन आने वाला हैं।?कही मुद्दा गर्म न हो जाये इस लिए जिला प्रशासन के अधिकारियों ने उसे ठंडे फ्रीजर में रखना उचित समझा?
जिला प्रशासन द्वारा इस प्रकरण की जांच हुई है या नहीं ,अथवा चल रही है या पूरी हो चुकी है? ,तो प्रधान पर लगे आरोप सार्वजनिक मिडिया में प्रेस कांफ्रेंस कर जारी क्यों नहीं किया गया।?सवाल तो पूछेंगे


