पूणे

मोगलिक्स ने डीआरजी इंडस्ट्रीज़ की नेक्स्ट-जैन बिटुमेन युनिट के साथ एनर्जी सेक्टर में किया प्रवेश

मोगलिक्स ने डीआरजी इंडस्ट्रीज़ की नेक्स्ट-जैन बिटुमेन युनिट के साथ एनर्जी सेक्टर में किया प्रवेश

 

आधुनिक ऑटोमेशन, सस्टेनेबल हीटिंग एवं 28000 मीट्रिक टन से अधिक क्षमता के साथ कोसी कालन में स्थित यह युनिट मोगलिक्स की मैनुफैक्चरिंग फुटप्रिन्ट का विस्तार करेगी

पुणे : एशिया की सबसे बड़ी बी2बी ई-कॉमर्स एवं सप्लाई चेन टेक्नोलॉजी कंपनियों में से एक मोगलिक्स ने अपनी की मैनुफैक्चरिंग शाखा डीआरजी इंडस्ट्रीज़ के तहत ग्रीनफील्ड बिटुमेन प्रोसेसिंग युनिट के उद्घाटन की घोषणा की है। मथुरा के कोसी कालन में स्थित यह युनिट जुलाई 2025 में कमर्शियल उत्पादन शुरू कर देगी। यह कदम भविष्य के अनुकूल स्थायी सामग्री के साथ भारत के इन्फ्रास्ट्रक्चर में बदलाव लाने की दिशा में मोगलिक्स की प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है।

विकसित भारत के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए ऐसे इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास ज़रूरी है जो न सिर्फ विस्तृत हो बल्कि टिकाउ, सुरक्षित एवं स्थायी भी हो। दुनिया के दूसरे सबसे बड़े सड़क नेटवर्क के साथ, भारत के लिए अगला लक्ष्य पर्यावरण संरक्षण एवं सुरक्षा को सुनिश्चित करते हुए सड़की गुणवत्ता को बढ़ाना और इन्हें टिकाउ बनाना है।

सड़क सुरक्षा देश की पहली प्राथमिकता है। देश ने 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने का लक्ष्य तयइ किया है, ऐसे में सड़कों के निर्माण के लिए ऐसी सामग्री की ज़रूरत है जो सतह को टिकाउ बनाए और साथ ही जोखिम की संभावना को भी कम करे। बिटुमेन मैनुफैक्चरिंग में मोगलिक्स का प्रवेश स्मार्ट एवं सुरक्षित सड़कों के निर्माण की दिशा में उल्लेखनीय कदम है।

डीआरजी इंडस्ट्रीज़ के माध्यम से मोगलिक्स आधुनिक, वैल्यू-एडेड, उच्च परफोर्मेन्स देने वाले बिटुमेन प्रोडक्ट्स का उत्पादन करेगा, जिसमें पॉलिमर-मॉडिफाईड बिटुमेन, माइक्रोसरफेसिंग ग्रेड इमल्ज़न और हार्ड बाइंडर्स शामिल हैं। ये सभी समाधान सड़कों को टिकाउ बनाने, रखरखाव की आवश्यकता को कम करने तथा कार्बन फुटप्रिंन्ट को कम करने में कारगर हैं।

इस युनिट की मुख्य पेशकश है- माइक्रोसरफेसिंग- जिसे दरारों को सील करने, सड़क पर फ्रिक्शन में सुधार लाने और सड़कों को अधिक टिकाउ बनाने के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। पारम्परिक सरफेसिंग से तुलना करें तो माइक्रोसरफेसिंग पेवमेन्ट की लाईफ को दोगुना कर देती है, साथ ही कार्बन उत्सर्जन में भी 44 फीसदी तक की कमी लाती है।

इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए मोगलिक्स स्वदेशी आर एण्ड डी में भी निवेश कर रही है, जिसके द्वारा भारत की भोगौलिक परिस्थितियों, यातायात के प्रतिरूप एवं जलवायु को ध्यान में रखते हुए बिटुमेन समाधान विकसित किए जाएंगे।

इस अवसर पर राहुल गर्ग, संस्थापक एवं सीईओ, मोगलिक्स ने कहा, ‘‘हमारी सड़कें विकसित भारत का आधार हैं। इन्हें मज़बूत और स्मार्ट बनाने के लिए टिकाउ और स्थायी सामग्री की आवश्यकता है। डीआरजी इंडस्ट्रीज़, ज़िम्मेदारी के साथ सड़कों को टिकाउ बनाने इनके परफोर्मेन्स को बेहतर बनाने की हमारी प्रतिबद्धता का प्रमाण है।’’

3.5 एकड़ में फैली डीआरजी इंडस्ट्रीज़ की युनिट में डेनीमोटेक मिल्स, फुली ऑटोमेटेड प्रोसेसिंग लाइन्स और समर्पित इन-हाउस आर एण्ड डी सेंटर है। 28,000 मीट्रिक टन से अधिक मासिक इंस्टॉल्ड प्रोसेसिंग क्षमता के साथ यह युनिट मोगलिक्स को भारत के विकसित होते बिटुमेन सिस्टम में मुख्य प्लेयर के रूप में स्थापित करती है।

यह युनिट बायोमास-फ्यूल्ड, कार्बन-न्यूट्रल उच्च क्षमता के बॉयलर (स्क्रबर सिस्टम एवं फिल्टर बैग से युक्त) इस्तेमाल करती है, जिससे हीटिंग की प्रक्रिया अधिक स्थायी हो जाती है। ये सभी प्रयास मोगलिक्स की ईएसजी योजनाओं के अनुरूप हैं।

उत्तरी एवं मध्य भारत पर फोकस करते हुए यह प्लांट उत्तर प्रदेश, एनसीआर, बिहार, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड, जम्मू-कश्मीर में इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में सहयोग प्रदान करेगा, साथ ही नेपाल के निर्यात बाज़ार को भी अपनी सेवाएं प्रदान करेगा।

भारत की इन्फ्रास्ट्रक्चर संबंधी महत्वाकांक्षाओं को साकार करने के अलावा यह युनिट रोज़गार के अवसर उत्पन्न करेगी, साथ ही वेंडर एवं कॉन्ट्रैक्टर पार्टनरशिप्स के साथ क्षेत्रीय एसएमई सिस्टम को भी सशक्त बनाएगी।

एक ग्रीनफील्ड परियोजना के रूप में, डीआरजी इंडस्ट्रीज़, ऐसे ओद्यौगिक इन्फ्रास्ट्रक्चर के डिज़ाइन, विकास एवं संचालन को बढ़ावा देने की मोगलिक्स की क्षमता की पुष्टि करती है, जो राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुसार स्थायी एवं स्केलेबल हो। कंपनी ने देश भर में अपनी बिटुमेन मैनुफैक्चरिंग फुटप्रिन्ट को बढ़ाने की योजना बनाई हैं।

 

 

 

 

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