
ग्रामीण भारत में स्वास्थ्य सेवा को प्रभावी और सुलभ बना रही है ‘आरोग्य एटीएम’ की पहल
‘क्लिनिक्स ऑन क्लाउड’ की अभिनव संकल्पना से साकार हो रहा है डिजिटल स्वास्थ्य का सपना
पुणे,: भारत की 140 करोड़ से अधिक आबादी को ध्यान में रखते हुए, यह सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक हो गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिक भी सुलभ, प्रभावी और गुणवत्ता युक्त स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित न रहें। इसी उद्देश्य को लेकर पुणे के अभय और मनश्री अग्रवाल दंपत्ति ने ‘क्लिनिक्स ऑन क्लाउड’ नामक आरोग्य एटीएम की अभिनव संकल्पना शुरू की है।
इस आरोग्य एटीएम के माध्यम से मात्र 10 मिनट में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित प्रणाली द्वारा 65 से अधिक स्वास्थ्य जांचें की जा सकती हैं और उनके रिपोर्ट्स भी तुरंत प्राप्त होते हैं। इससे न केवल समय की बचत होती है, बल्कि टेलीमेडिसिन जैसी सेवाओं को ग्रामीण इलाकों में प्रभावी रूप से लागू करना भी संभव हो जाता है। यह जानकारी ‘क्लिनिक्स ऑन क्लाउड’ के संस्थापक एवं सीईओ अभय अग्रवाल ने पुणे में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान दी।
इस अवसर पर कंपनी की सह-संस्थापक और प्रबंध निदेशक मनश्री अग्रवाल एवं महाराष्ट्र में वितरण व्यवस्था संभालने वाली डाइनाब्लेज़ कंपनी के अजय ढुमणे भी उपस्थित थे।
अभय अग्रवाल ने बताया, “ग्रामीण भारत में आज भी स्वास्थ्य ढांचा अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाया है। कई स्थानों पर डॉक्टर तो हैं, लेकिन आवश्यक जांच की सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। जहां सुविधाएं हैं, वहां रिपोर्ट मिलने में समय लगता है, जिससे त्वरित निदान संभव नहीं हो पाता। इस समस्या के समाधान के रूप में आरोग्य एटीएम विकसित किया गया है, जो मात्र 10 मिनट में सटीक और विश्वसनीय जांच परिणाम देता है। इन जांचों की सटीकता 95% से अधिक है।”
जहां आम तौर पर इन जांचों के लिए 3500 से 4000 रुपये खर्च होते हैं, वहीं आरोग्य एटीएम के माध्यम से यही जांचें 500 से 1500 रुपये के भीतर कराई जा सकती हैं। इससे निवारक स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा मिल रही है।
मनश्री अग्रवाल ने बताया कि यह एटीएम बिजली और इंटरनेट के बिना भी कार्यरत रह सकता है। इसमें 19 मूलभूत जांचों के अलावा हृदय रोग, मधुमेह, रक्तचाप, हीमोग्लोबिन, एचबीए1सी, मानसिक स्वास्थ्य, फेफड़े, आंख, कान, दांत, त्वचा, किडनी से संबंधित जांचों के साथ-साथ डेंगू, मलेरिया, कोविड, एचआईवी, टायफॉइड और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों की रैपिड जांचें भी की जा सकती हैं।
इस आरोग्य एटीएम में उपयोग की जाने वाली सभी तकनीकें वैश्विक मानकों पर प्रमाणित हैं तथा ISO और CDSCO द्वारा मान्यता प्राप्त हैं, जिससे न केवल डेटा सुरक्षा सुनिश्चित होती है, बल्कि परिणामों की विश्वसनीयता भी कायम रहती है।
डाइनाब्लेज़ कंपनी के अजय ढुमणे ने बताया कि ये मशीनें सरकारी व निजी अस्पतालों, क्लीनिकों, आशा कार्यकर्ताओं आदि के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित की जा सकती हैं। इन्हें किराये या ईएमआई पर भी प्राप्त किया जा सकता है, जिससे स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिल सकता है।
रिपोर्ट प्राप्त होते ही ग्रामीण मरीज अपनी आवश्यकता अनुसार रिपोर्ट ईमेल या व्हाट्सएप के माध्यम से शहरी डॉक्टरों को भेज सकते हैं। इसके बाद आरोग्य एटीएम के टेलीमेडिसिन फीचर के जरिए डॉक्टर से तुरंत संपर्क कर उपचार की प्रक्रिया आरंभ की जा सकती है।
वर्तमान में भारत के 150 से अधिक शहरों और 7 देशों में कुल 3000 से अधिक आरोग्य एटीएम कार्यरत हैं तथा 80 लाख से अधिक लोग अब तक इनसे लाभान्वित हो चुके हैं।


