पूणे

तुकड़ाबंदी कानून को रद्द करने का निर्णय स्वागतयोग्य – डॉ. हुलगेश चलवादी

तुकड़ाबंदी कानून को रद्द करने का निर्णय स्वागतयोग्य – डॉ. हुलगेश चलवादी

बसपा’ की मांग को मिली सफलता; बिल्डरों को लाभ पहुंचाने वाली नीति अब रद्द होगी

 

पुणे:राज्य के राजस्व मंत्री द्वारा विधानसभा में यह घोषणा की गई कि शहरी क्षेत्रों में जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़े 78 वर्ष पुराने तुकड़ाबंदी कानून को रद्द किया जाएगा। यह कानून अब तक एक बड़ी समस्या बना हुआ था। बहुजन समाज पार्टी ने इस वर्ष की शुरुआत में ही इस कानून को रद्द करने की मांग की थी। अब सरकार द्वारा इस दिशा में उठाया गया कदम स्वागत योग्य है, ऐसा प्रतिपादन बहुजन समाज पार्टी के प्रदेश महासचिव एवं पश्चिम महाराष्ट्र ज़ोन के प्रभारी डॉ. हुलगेश चलवादी ने गुरुवार (10 जुलाई) को किया।

 

अब तक राज्य की भूमि संबंधी सरकारी नीतियाँ बिल्डरों को लाभ पहुँचाने वाली और गरीब तथा मध्यमवर्गीय लोगों के लिए हानिकारक रही हैं। आम नागरिकों को भी अपना सपना साकार करने के लिए शहरी एवं उपनगरीय क्षेत्रों में भूखंड खरीद-बिक्री के नियमों में बदलाव समय की मांग थी। वर्तमान प्रक्रिया केवल डेवलपरों को लाभ देने वाली थी और उनके फ्लैटों की बिक्री बढ़ाने के उद्देश्य से बनाई गई थी – ऐसा आरोप डॉ. चलवादी ने लगाया।

डॉ. चलवादी ने आगे कहा कि इस कानून के रद्द होने से राज्य के 50 लाख से अधिक नागरिकों को सीधा लाभ होगा। 12 जुलाई 2021 के परिपत्र के अनुसार एक, दो अथवा तीन गुंठा जमीन की खरीद-बिक्री पर सरकार ने पाबंदी लगाई थी। भारी विरोध के चलते इसमें बाद में संशोधन कर जिरायत जमीन के लिए 20 गुंठा और बागायत के लिए 11 गुंठा की सीमा तय की गई थी। लेकिन अब चूंकि यह कानून ही रद्द किया जा रहा है, इसलिए शहरी क्षेत्रों में एक गुंठा जमीन की भी खरीद-बिक्री कानूनी रूप से संभव होगी — यह स्पष्ट करते हुए डॉ. चलवादी ने इस निर्णय का स्वागत किया।

आम नागरिकों को फर्जीवाड़े से राहत मिलेगी!

डॉ. चलवादी ने यह भी बताया कि कोई भी सामान्य व्यक्ति एक साथ 11 गुंठा जमीन नहीं खरीद सकता। बहुत से लोग एक-दो गुंठा जमीन खरीद कर अपना सपना साकार करते हैं। लेकिन तुकड़ाबंदी कानून के चलते खरीद-बिक्री के व्यवहार होने के बावजूद जमीन के टुकड़े नियमित नहीं हो पाते थे। ऐसी स्थिति में ‘पॉवर ऑफ अटॉर्नी’ या ‘बिनामिकरार’ के माध्यम से जमीन खरीदने के अलावा आम नागरिकों के पास कोई विकल्प नहीं रहता था। इस प्रक्रिया में खरीदार का नाम सात-बारा दस्तावेज़ पर नहीं चढ़ता था। इसी का फायदा उठाकर कुछ जमीन मालिक एक ही जमीन को कई लोगों को बेच देते थे और खरीदारों की ठगी करते थे।

 

अब जब यह कानून ही रद्द होने जा रहा है, तब आम नागरिक इस प्रकार की धोखाधड़ी से मुक्त हो सकेंगे — ऐसा विश्वास डॉ. हुलगेश चलवादी ने व्यक्त किया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button