
जटिल लॅमिनेक्टोमी प्रक्रिया से रीड की हड्डी में दुर्लभ ट्युमर निकालने में नोबल हॉस्पिटल्स के डॉक्टर्स को मिली सफलता
पुणे: नोबल हॉस्पिटल्स के डॉक्टर्स की टीम ने ३८ साल के महिला आईटी इंजीनियर के रीड की हड्डी में हुए दुर्लभ ट्यूमर को लॅमिनेक्टोमी ॲन्ड डीकॉम्प्रेशन ऑफ कॉर्ड इस प्रक्रिया से यशस्वी रूप से निकला. इस टीम का नेतृत्व नोबल हॉस्पिटल्स ॲन्ड रिसर्च सेंटर के स्पाइन सर्जन डॉ. विशाल चौधरी ने किया. इस ट्यूमर के जगह के कारण यह सर्जरी बहुत जटिल थी. छह महीनों से गंभीर दर्द हो रहे इस महिला को इससे राहत मिल चुकी है और अब वापस काम पर जाने को वह तैयार है.
इसके बारे में जानकारी देते हुए नोबल हॉस्पिटल्स ॲन्ड रिसर्च सेंटर के स्पाइन सर्जन डॉ. विशाल चौधरी ने कहा की, छह महीने पहले यह महिला इंजिनियर हमारे ओपीडी में आयी थी. तब लगातार हो रहे पीठ के गंभीर दर्द से वोह जूझ रही थी. किसी भी काम के बिना या रात को नींद में या किसी भी समय पीठ में दर्द होने लगा था. इसके बाद उन्होंने अन्य जगह दवाइया और फिजिओथेरपी के द्वारा उपचार लेने का प्रयत्न किया, लेकिन दर्द कम नहीं हुआ. इस तरह के लक्षण ध्यान में लेते हुए रीड की हड्डी का एमआरआई करने का हमने फैसला लिया. उसमें रीड की हड्डी के बीच में ट्यूमर होने का निदान हुआ, जिसे टेराटोमा ऑफ कॉर्ड ॲट डी९ लेव्हल कहते है.
(रीड की हड्डी में निर्माण हुए टेराटोमा ऑफ कॉर्ड ॲट डी९ लेव्हल इस जंतु पेशी से निर्माण होने वाला यह एक दुर्लभ ट्यूमर है. यह ट्युमर सामान्यत: रीड के हड्डी या आस पास के ऊतकों में पाया जाता है. इस ट्यूमर का निदान आम तौर पर एमआरआय या हिस्टोलॉजिकल टेस्ट (कोशिकाओं की मायक्रोस्कॉपिक टेस्ट) द्वारा किया जाता है. उपचार में कई बार ट्यूमर निकालने के लिए और रीड के हड्डी पर से दबाव कम करने के लिए यह शस्त्रक्रिया की जाती है. )
इस तरह के ट्यूमर दुर्लभ होते है. अगर इसका निदान समय पर नहीं हुआ तो पैरो की ताकत कम हो सकती है और रीड की हड्डी का हमेशा के लिए नुकसान हो सकता है शकते. इसलिए हमने लॅमिनेक्टोमी ॲन्ड डीकॉम्प्रेशन ऑफ कॉर्ड प्रक्रिया करने का निर्णय लिया ऐसा डॉ. चौधरी ने कहा. आगे की जटिलता ना हो इसलिए इस प्रक्रिया की जरूरत के बारे में मरीज का समुपदेशन किया गया.
लॅमिनेक्टोमी इस प्रक्रिया दौरान रीड की हड्डी पर या नसों पर आने वाला दबाव कम करने के लिए कशेरूका हड्डी का भाग (लॅमिना) निकाल दिया जाता है. मायक्रोस्कोप, एंडोस्कोप के इस्तेमाल से सर्जन को अधिक अच्छा दृश्य प्रदान होता है और इससे कम से कम छेद से अधिक सटीकता से काम किया जा सकता है. इस प्रक्रिया में किसी भी नसों पर कोई दबाव आ रहा है क्या या कुछ परिणाम हो रहा है क्या यह जानने के लिए लगातार न्यूरो मॉनिटरिंग सिस्टिम का इस्तेमाल किया जाता है. ट्यूमर की जगह, प्रक्रिया और उससे संबंधित जोखिम के लिए विशेष कौशल्य आवश्यक होता है. इस सर्जिकल प्रक्रिया को लगभग साडेचार घंटे लगे.
इस प्रक्रिया के दौरान ५ X५ X३ इस आकार का ट्यूमर निकाला गया. पॅथॉलॉजी रिपोर्ट में यह ट्यूमर कैंसर ग्रस्त नहीं है और एक ही जगह है लेकिन आक्रमक है ऐसा निदान हुआ. इस प्रकार की सर्जरी जटिल होती है और सर्जरी के बाद पैरों की ताकद जाने या मूत्राशय में संवेदना कम होने की जोखिम हो सकती है.
डॉ. विशाल चौधरी ने कहा की, इस सर्जरी के बाद अब यह महिला पूरी तरह से ठीक है और घर में हर रोज का काम और सोसायटी के परिसर में चलना यह सब कर रही है और अब अपने काम पर जाने के लिए तैयार है.
उन्होंने आगे कहा की, ऐसी स्थिति के कारण जल्दी निदान और उपचार का महत्व रेखांकित होता है. हम कई बार रीड की हड्डी को दुर्लक्षित करते है. लेकिन जब दर्द कम नहीं होता और अपने रोज के काम पर इसका परिणाम होता है तब डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है. कई लोग रीड की हड्डी के सर्जरी के लिए तैयार नहीं होते, लेकिन उपचार का तरीका अब आधुनिक हो चुका है और सर्जरी के बाद की जोखीम काफी कम हुई है.
नोबल हॉस्पिटल्स ॲन्ड रिसर्च सेंटर के संचालक डॉ. दिविज माने ने कहा की की, इस यशस्वी प्रक्रिया से निदान से उपचार में शामिल हमारे टीम का कौशल्य और साथ ही में आधुनिक तंत्रज्ञान और अद्ययावत सुविधा से प्रक्रिया में सटीकता और मरीजों के लिए अच्छे परिणाम दर्शाते है. इस कामयाबी के लिए इस पूरे टीम का हम अभिनंदन करते है. यह इंजीनियर अपने काम पर वापस जा सकती है इसका हमें विशेष आनंद है.


