
राज्य विधानसभा के मानसून सत्र में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर सांस्कृतिक भवन विस्तार को लेकर तीव्र आंदोलन
15 अगस्त को पुणे जिलाधिकारी कार्यालय पर होगा आंबेडकरी समाज का विशाल आंदोलन
पुणे,डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर सांस्कृतिक भवन विस्तार कृती समिति, पुणे की ओर से राज्य के आज से प्रारंभ हुए मानसून सत्र के दौरान आंदोलन किया जा रहा है। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो 15 अगस्त को आंबेडकरी समाज की ओर से पुणे जिलाधिकारी कार्यालय के समक्ष विशाल “जवाब दो आंदोलन” किया जाएगा।
मंगलवार पेठ स्थित ससून अस्पताल के सामने की ज़मीन पर डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर सांस्कृतिक भवन का विस्तार किया जाए और वहां राष्ट्रीय स्तर का स्मारक स्थापित किया जाए, यह मांग विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े आंबेडकरी नेताओं द्वारा की जा रही है। समिति द्वारा सोमवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में यह जानकारी दी गई।
वर्ष 2000 में पुणे महानगरपालिका की स्थायी समिति व मुख्य सभा ने सर्वे नंबर 405 की ज़मीन को भवन विस्तार के लिए देने का बहुमत से निर्णय लिया था, लेकिन 4 सितंबर 2024 को इस ज़मीन को अवैध रूप से N.G. Ventures नामक निजी कंपनी को 60 वर्षों के लीज़ पर सौंप दिया गया। यह निर्णय महानगरपालिका के पूर्व निर्णयों के विरुद्ध और नियमों की अनदेखी कर लिया गया। सभी दलों के नेताओं ने मांग की है कि यह ज़मीन निजी कंपनी को न दी जाए, क्योंकि यह आंबेडकरी अस्मिता से जुड़ा मामला है।
पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख और बाद में 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी भवन विस्तार के लिए इस ज़मीन को देने का आश्वासन दिया था। इसलिए, पुणे महानगरपालिका के 2000 के ठहराव की त्वरित अमल में लाकर इस ज़मीन पर सांस्कृतिक भवन और स्मारक का कार्य शीघ्र प्रारंभ किया जाना चाहिए। भवन में डॉ. आंबेडकर के विचारों के प्रचार-प्रसार के लिए रिसर्च सेंटर, प्रतियोगी परीक्षा केंद्र, अध्ययन कक्ष और अन्य सुविधाएं स्थापित की जाएं, जिससे समाज को न्याय मिल सके।
इस मुद्दे को लेकर समिति ने केंद्रीय राज्यमंत्री व पुणे के सांसद मुरलीधर मोहोळ से चर्चा की थी, जिनके माध्यम से उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से बैठक हुई। फडणवीस ने विषय को सकारात्मक बताते हुए कहा था कि तकनीकी पक्षों की समीक्षा के बाद निर्णय लिया जाएगा। इसके बाद उपमुख्यमंत्रियों अजित पवार व एकनाथ शिंदे से भी समिति ने मुलाकात कर निवेदन सौंपा। मुख्यमंत्री और मंत्रियों ने स्मारक निर्माण को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया था, किंतु अब तक इस विषय को मंत्रिमंडल में नहीं रखा गया, जिससे आंबेडकरी नेतृत्व में गहरा असंतोष है।
विशेष टिप्पणी
“माधुरी मिसाळ को डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर से इतनी एलर्जी क्यों?” आंबेडकरी नेताओं और कार्यकर्ताओं का तीखा सवाल
पुणे की विधायक एवं राज्यमंत्री माधुरी मिसाळ द्वारा सांस्कृतिक भवन के पास की ज़मीन को कैंसर अस्पताल के लिए देने की सार्वजनिक घोषणा पर आंबेडकरी समाज में तीव्र रोष व्याप्त है। जब यह ज़मीन पूर्व में डॉ. आंबेडकर स्मारक के लिए आरक्षित की गई थी, और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे द्वारा इसे बिल्डर को सौंपे जाने पर माधुरी मिसाळ चुप थीं, तब उनके मौन पर भी सवाल उठे थे। अब जबकि मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री स्मारक हेतु ज़मीन देने को तैयार हैं, फिर भी मिसाळ कैंसर अस्पताल की आड़ में स्मारक के रास्ते में बाधा बन रही हैं। जबकि येरवड़ा मानसिक आरोग्य केंद्र की 27 एकड़ भूमि अथवा ससून अस्पताल परिसर की 4.6 लाख स्क्वेयर फुट ज़मीन कैंसर अस्पताल के लिए उपयुक्त है। ऐसे में आंबेडकरी समाज ने तीव्र आक्रोश व्यक्त करते हुए पूछा है — “क्या माधुरी मिसाळ को बाबासाहेब से इतनी नफ़रत है?”
यदि इस मानसून सत्र में इस विषय पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन और भी उग्र रूप धारण करेगा — यह स्पष्ट इशारा समिति द्वारा पत्रकार परिषद में दिया गया।


