
समय से पूर्व जन्म लिए नवजात शिशुओं में अंधेपन को रोकने के लिए राष्ट्रीय परामर्श एवं विचार-मंथन कार्यक्रम पुणे में संपन्न
पुणे,: भारत में रेटिनोपॅथी ऑफ प्रीमॅच्युरिटी के कारण होने वाली अंधेपन की रोकथाम की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, पीबीएमए के एच.व्ही. देसाई आय हॉस्पिटल, पुणे यहाँ पर रेटिनोपॅथी ऑफ प्रीमॅच्युरिटी (आरओपी) पर राष्ट्रीय परामर्श एवं विचार-मंथन कार्यक्रम का आयोजन किया गया था. कॉग्निझंट फाउंडेशन, मिशन फॉर व्हिजन और पीबीएमए के एच.व्ही.देसाई आय हॉस्पिटल की सहयोग से शुरू किए साइट४ऑल इस उपक्रम के अंतर्गत देशभर के विशेषज्ञ और भागधारक एक साथ आये थे.
इस कार्यक्रम में इंडियन आर.ओ.पी सोसायटी, नॅशनल निओनॅटोलॉजी फोरम (एनएनएफ), इंडियन ऍकॅडमी ऑफ पेडियाट्रिक्स (आयएपी), सरकारी अधिकारी, सीएसआर क्षेत्र के नेतृत्व, ना-नफा तत्त्व पर काम करनेवाली संस्था और इंडियन आर.ओ.पी सोसायटी के अध्यक्ष प्रो.डॉ.राजवर्धन आझाद इनके साथ कई विशेषज्ञों का सक्रिय सहभाग दिखाई दिया.
रेटिनोपॅथी ऑफ प्री-मॅच्युरिटी (आरओपी) यह समय से पूर्व जन्म लिए शिशुओं के आँखों की एक गंभीर समस्या है. यदि इसका जल्दी निदान न किया जाए तो इससे हमेशा के लिए अंधापन आ सकता है. यह स्थिति 34 सप्ताह से पहले जन्मे और 2000 ग्राम से कम वजन वाले नवजात शिशुओं में देखी जाती है. यदि उपचार न किया जाए तो रेटिना आसपास के ऊतकों से अलग हो जाता है (रेटिनल डिटॅचमेंट ),इससे दृष्टीदोष निर्माण हो सकता है अथवा अंधापन आ सकता है.


