पूणे

मानसून आपदा प्रबंधन पर सभी विभाग समन्वय से करें काम : विधानसभा उपाध्यक्ष अण्णा बनसोडे

मानसून आपदा प्रबंधन पर सभी विभाग समन्वय से करें काम : विधानसभा उपाध्यक्ष अण्णा बनसोडे

 

पुणे:पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका क्षेत्र में मानसून पूर्व भारी बारिश को देखते हुए आगामी मानसून के दौरान संभावित आपदाओं से निपटने के लिए सभी संबंधित विभागों को समन्वय के साथ काम करने के निर्देश विधानसभा उपाध्यक्ष अण्णा बनसोडे ने दिए हैं। उन्होंने कहा कि नागरिकों को राहत देने के लिए सभी आवश्यक सुविधाओं की पूर्व तैयारी सुनिश्चित की जाए।

 

महानगरपालिका में आयोजित मानसून पूर्व समीक्षा बैठक में श्री बनसोडे ने कहा कि मौसम विभाग के अनुसार इस वर्ष औसत या उससे अधिक बारिश की संभावना है। ऐसे में नालों की सफाई के शेष कार्य युद्धस्तर पर पूरे किए जाएं। जिन क्षेत्रों में जलभराव की संभावना है, वहां के नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने के लिए अस्थायी शेल्टर होम्स की व्यवस्था की जाए। इन शेल्टर होम्स में भोजन, निवास, बिस्तर आदि सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

 

उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की जनहानि न हो, इसके लिए पूरी सतर्कता बरती जाए। यदि किसी का घर या संपत्ति क्षतिग्रस्त होती है तो राजस्व विभाग तत्काल पंचनामा करे और प्रभावितों को शत-प्रतिशत सहायता मिले, यह सुनिश्चित किया जाए।

 

जलसंपदा विभाग को निर्देश दिए गए कि बांध से पानी छोड़े जाने की पूर्व सूचना समय रहते दें और आपदा की स्थिति में चेतावनी नागरिकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाई जाए। यातायात व्यवस्था सुचारू रखने के लिए वैकल्पिक मार्ग तैयार रखें और पुलिस प्रशासन ट्रैफिक जाम न हो, इसका ध्यान रखे। नगर सीमा में सीसीटीवी कैमरे चालू रहें, इसकी निगरानी की जाए। बचाव कार्य के लिए NDRF टीम से सतत संपर्क में रहें तथा नाव, राहत सामग्री आदि तैयार रखें।

 

श्री बनसोडे ने कहा कि पवना, मुळा और इंद्रायणी नदियों के किनारे बस्तियों में बाढ़ का पानी न पहुंचे, इसके लिए नदी सुधार परियोजनाओं को गति दी जाए और भविष्य में सीमाभिंतियों का निर्माण जरूरी है।

 

मनपा आयुक्त शेखर सिंह ने बताया कि 1 जून से आपदा नियंत्रण कक्ष, जलसंपदा विभाग और आपदा प्रबंधन कक्ष 24×7 सक्रिय रहेंगे। अस्थायी शेल्टर होम्स निर्धारित किए गए हैं, जहां सभी आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। आपदा प्रबंधन के लिए 1,000 करोड़ रुपये की मांग की गई है, जिसमें से 570 करोड़ रुपये पवना नदी बाढ़ नियंत्रण के लिए प्रस्तावित हैं। इसमें प्राकृतिक नालों का पुनरुद्धार, बाढ़ जोखिम कम करने, नागरिकों की सुरक्षा और आधारभूत सुविधाओं का संरक्षण शामिल है।

 

बैठक में अतिरिक्त पुलिस आयुक्त, उपजिलाधिकारी, जलसंपदा, राजस्व, आपदा प्रबंधन सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे। सभी विभागों को नागरिकों की सुरक्षा के लिए समन्वित और योजनाबद्ध कार्यवाही करने का आह्वान किया गया।

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