पूणे

बुद्ध जयंती के उपलक्ष्य में शहीद जवानों के परिवारों को एक लाख का धनादेश प्रदान:– डॉ. सिद्धार्थ धेंडे और मित्र परिवार की पहल

संवेदना से ही उत्पन्न हुए बुद्ध विचार : राहुल डंबाळे

बुद्ध जयंती के उपलक्ष्य में शहीद जवानों के परिवारों को एक लाख का धनादेश प्रदान:– डॉ. सिद्धार्थ धेंडे और मित्र परिवार की पहल

 

पुणे : (विशाल समाचार प्रतिनिधि)

 

“युद्ध नहीं, बुद्ध चाहिए” — यह संदेश दुनिया तक पहुँचना आवश्यक है। युद्ध का कोई अंत नहीं होता, यह बात यूक्रेन और रूस के बीच चल रहे युद्ध से स्पष्ट होती है। संवेदना से ही भगवान गौतम बुद्ध, सम्राट अशोक और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर का उदय हुआ। उन्होंने बुद्ध विचारों के मार्ग पर चलते हुए शांति का प्रसार किया। शहीद जवानों के परिवारों की संवेदना से प्रेरित होकर इस वर्ष के कार्यक्रम का व्यय ‘आर्मी रिलीफ फंड’ को दान देना एक सराहनीय उपक्रम है, ऐसा प्रतिपादन रिपब्लिकन युवा मोर्चा के अध्यक्ष राहुल डंबाळे ने किया।

 

प्रभाग क्रमांक दो स्थित लुंबिनी उद्यान में माजी उपमहापौर डॉ. सिद्धार्थ धेंडे और उनके मित्र परिवार द्वारा हर वर्ष बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर ‘भीम-बुद्ध गीतों’ का सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। इस वर्ष शहीद जवानों को श्रद्धांजलि स्वरूप कार्यक्रम रद्द कर दिया गया। कार्यक्रम के लिए निर्धारित राशि शहीद जवानों के परिवारों को देकर संवेदना प्रकट करने का संकल्प डॉ. धेंडे ने लिया। उसी के अनुसार, महार बटालियन के सेवानिवृत्त सैनिकों को एक लाख रुपये का धनादेश ‘आर्मी रिलीफ फंड’ के नाम पर सुपुर्द किया गया।

इस अवसर पर डंबाळे ने संबोधित करते हुए उक्त बातें कहीं। कार्यक्रम में भंते नागघोष, भंते धम्मानंद, भंते प्रियदर्शी, भंते अंकुश माला इत्यादि भिक्षुओं ने त्रिशरण, पंचशील और धम्मदेशना दी। इस दौरान आंबेडकरी आंदोलन से जुड़े रिपब्लिकन युवा मोर्चा के अध्यक्ष राहुल डंबाळे, सुवर्णा पवार, यशवंत शिर्के, विजय गायकवाड, विजय कांबळे, गजानन जागडे, नामदेव घाडगे, सोपान लभाणे, सुभाष कांबळे, अनिल ननावरे, मेजर रणपिसे, मालती धीवार, रजनी वाघमारे, कविता घाडगे, मंगला गमरे, महार बटालियन के कैप्टन पोळके, सूबेदार वानखेडे और अन्य सहयोगी उपस्थित थे।

 

कार्यक्रम की शुरुआत भगवान गौतम बुद्ध और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि देने से हुई। त्रिशरण और पंचशील का ग्रहण किया गया तथा धम्मदेशना आयोजित की गई। साथ ही महार बटालियन के पूर्व सैनिकों का सम्मान किया गया और भंते संघ का स्वागत किया गया।

 

इस अवसर पर डॉ. सिद्धार्थ धेंडे ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार से अनुरोध है कि जैसे पहलगाम में हुए कायरतापूर्ण आतंकी हमले में मृत नागरिकों के परिवारों को 50 लाख की आर्थिक सहायता दी गई है, उसी तरह युद्ध में शहीद हुए सैनिकों के परिवारों को भी 50 लाख रुपये की सहायता दी जानी चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि केंद्र सरकार को शहीदों के परिवारों की पूरी जिम्मेदारी लेनी चाहिए।

 

कार्यक्रम में उपस्थित भंते ने “युद्ध नहीं, बुद्ध चाहिए” यह संदेश देते हुए बताया कि बुद्ध ने शांति और करुणा की शिक्षा दी है, लेकिन आत्मरक्षा (चाहे वह स्वयं की हो या देश की) के लिए यदि हिंसा आवश्यक हो, तो वह अनुचित नहीं है — यह उदाहरण देकर उन्होंने तथागत गौतम बुद्ध के वास्तविक शांति संदेश को स्पष्ट किया।

 

 

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