
“साहित्यरत्न जीवन गौरव पुरस्कार 2025” वरिष्ठ साहित्यकार एवं पत्रकार अरुण खोरे को घोषित
पुणे,: लोकशाहीर अण्णाभाऊ साठे की 105वीं जयंती के उपलक्ष्य में विश्वभूषण डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर सांस्कृतिक महोत्सव समिति, पुणे की ओर से वर्ष 2025 का “साहित्यरत्न जीवन गौरव पुरस्कार” वरिष्ठ साहित्यकार, लेखक एवं पत्रकार श्री अरुण खोरे को प्रदान किया जाएगा। यह जानकारी समिति के अध्यक्ष श्री परशुराम वाडेकर ने एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से दी।
यह सम्मान समारोह 1 अगस्त 2025 को सायं 7:00 बजे सम्यक विहार विकास केंद्र, बोपोडी, पुणे में आयोजित किया जाएगा। पुरस्कार समारोह की अध्यक्षता सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. विजय खरे करेंगे, जबकि पुरस्कार प्रदान करेंगे वरिष्ठ साहित्यकार एवं पूर्व मराठी साहित्य संमेलनाध्यक्ष डॉ. श्रीपाल सबनीस। इस अवसर पर पुणे की पूर्व उपमहापौर श्रीमती सुनीता परशुराम वाडेकर प्रमुख अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगी।
पुरस्कार में स्मृति-चिन्ह, शाल, सम्मान-पत्र एवं रुपये 11,000/- की नकद राशि प्रदान की जाएगी।
श्री अरुण खोरे पिछले 47 वर्षों से साहित्य और पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे सकाळ, लोकमत, पुढारी, प्रभात जैसे प्रमुख मराठी दैनिकों में संपादक पद पर कार्य कर चुके हैं, वहीं लोकसत्ता और पुण्यनगरी में उन्होंने महत्वपूर्ण दायित्व निभाए हैं। उनका आत्मकथात्मक ग्रंथ “पोरके दिवस” अत्यंत चर्चित रहा है। इसके अलावा “दो युरोप”, “इंदिरा प्रियदर्शिनी”, “मुद्रित माध्यमांसाठी लेखन कौशल्ये” आदि उनकी उल्लेखनीय कृतियाँ हैं।
श्री खोरे ने समाज के वंचित, दलित, दिव्यांग, श्रमिक महिलाओं जैसे वर्गों के मुद्दों को गहराई से उठाया है। उन्होंने महात्मा गांधी, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर, यशवंतराव चव्हाण और दलित आत्मकथाओं पर शोधपरक लेखन किया है। उनके संपादन में प्रकाशित विशेषांकों में महाड सत्याग्रह – 90वां स्मरण वर्ष, लोकशाही विचारधारा विशेषांक, दलित उद्यमिता विशेषांक, लोकसभा/विधानसभा चुनाव विशेषांक, महात्मा फुले-अंबेडकर स्मृति अंक प्रमुख हैं।
इससे पूर्व समिति द्वारा पुणे के अनेक सामाजिक कार्यकर्ताओं, परिवर्तनवादी आंदोलन से जुड़े नेताओं, साहित्यकारों और अधिकारियों को सम्मानित किया गया है। इनमें अंकल सोनवणे, रमेश राक्षे, प्रा. सुकुमार कांबळे, शाहीर दीनानाथ साठे, वाल्मीक अवघडे, दत्ता शेंडगे, सदाशिव वाघमारे, वसंत वाघमारे, शुभा अंगीर तथा दिवंगत विनायक जाधव (मरणोत्तर) को यह पुरस्कार प्रदान किया गया है।


