पूणे

ज्ञानेश्वर-तुकाराम के विचार ही बनाएंगे भारत को विश्वगुरु – अविनाश धर्माधिकारी

ज्ञानेश्वर-तुकाराम के विचार ही बनाएंगे भारत को विश्वगुरु – अविनाश धर्माधिकारी

 

पुणे:  “जब युवावर्ग ज्ञानेश्वर और तुकाराम के विचारों पर चलेगा, तभी भारत फिर से विश्वगुरु बन सकेगा। अध्यात्म और विज्ञान का समन्वय ही भारत को फिर से वैभवशाली बना सकता है। वर्तमान समय में युवाओं को नशे से मुक्त कर भक्ति की ओर प्रवृत्त करने का कार्य केवल वारकरी संप्रदाय ही कर सकता है।” यह विचार चाणक्य मंडल के संस्थापक अध्यक्ष श्री अविनाश धर्माधिकारी ने व्यक्त किए।

 

वे श्री क्षेत्र आळंदी (देवाची) में आयोजित ‘महाराष्ट्र वारकरी कीर्तनकार गोलमेज परिषद’ के उद्घाटन अवसर पर प्रमुख अतिथि के रूप में बोल रहे थे। यह परिषद एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी, स्कूल ऑफ एजुकेशन, पुणे तथा राष्ट्रीय सरपंच संसद के संयुक्त तत्वावधान में डॉ. विश्वनाथ कराड वर्ल्ड पीस स्कूल, हनुमानवाड़ी में आयोजित की गई।

इस दो दिवसीय परिषद में महाराष्ट्र के 70 कीर्तनकारों और 150 सरपंचों ने भाग लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता एमआईटी-डब्ल्यूपीयू के संस्थापक अध्यक्ष प्रा. डॉ. विश्वनाथ दा. कराड ने की। परिषद के संकल्पक व एमआईटी-डब्ल्यूपीयू के कार्याध्यक्ष डॉ. राहुल कराड उपस्थित रहे।

 

इस अवसर पर देहू के वरिष्ठ कीर्तनकार ह.भ.प. बापूसाहेब महाराज मोरे, खांडबहाले डॉट कॉम के संस्थापक डॉ. सुनील खांडबहाले, पद्मश्री पोपटराव पवार, तथा श्रीसंत नामदेव महाराज कीर्तन महाविद्यालय (मुंबई) के अध्यक्ष ह.भ.प. जगन्नाथ महाराज पाटील मंच पर उपस्थित थे।

डॉ. अविनाश धर्माधिकारी ने कहा कि वारकरी संप्रदाय युवाओं में चरित्र निर्माण हेतु अत्यंत आवश्यक है। शिक्षा का उद्देश्य भी यही होना चाहिए – चरित्र और कर्तृत्व का निर्माण। उन्होंने कहा कि ज्ञानोबा-तुकोबा ने भक्ति और शक्ति का संदेश दिया, जो आज भी समाज के लिए मार्गदर्शक है।

 

प्रो. डॉ. विश्वनाथ कराड ने कीर्तनकारों से आग्रह किया कि वे ज्ञानेश्वर-तुकाराम के संदेश को समाज तक पहुँचाएं। उन्होंने कहा कि “बुद्धि सद्बुद्धि बने, मन स्थिर हो – यह ज्ञानेश्वर की शिक्षा है।”

 

डॉ. सदानंद मोरे ने परिषद को सरकारी तंत्र और संत परंपरा के बीच एक सेतु बताया। उन्होंने कहा कि “वारी एक पॉवर हाउस है, जो समाज को दिशा देने में सक्षम है।”

 

डॉ. राहुल कराड ने कहा कि परिषद में सामाजिक जागरण, लोक-जीवन की समस्याओं के समाधान और आध्यात्मिक चेतना के विविध पहलुओं पर चर्चा की जा रही है। परिषद की दिशा, जनकल्याण की दृष्टि से स्पष्ट की जा रही है।

 

पद्मश्री पोपटराव पवार ने कहा कि वारकरी संप्रदाय ने सामाजिक एकता का निर्माण किया है। आज की सबसे बड़ी चुनौतियाँ – पर्यावरण, माटी का स्वास्थ्य और युवाओं में बढ़ती व्यसन-प्रियता हैं, जिनका समाधान संत साहित्य से मिल सकता है।

 

जगन्नाथ महाराज पाटील ने परिषद को ‘विश्वकल्याण के लिए गोलमेज सम्मेलन’ की संज्ञा दी और कहा कि वारकरी विचारधारा ही समस्याओं का वास्तविक समाधान है।

कार्यक्रम में प्रास्ताविक भाषण परिषद के समन्वयक योगेश पाटील ने दिया। संचालन डॉ. शलिनी टोणपे ने किया। समन्वय में प्रकाश महाले, यशोधन महाराज साखरे और रामकृष्ण महाराज भी सक्रिय रूप से उपस्थित रहे।

 

बापू महाराज मोरे और डॉ. सुनील खांडबहाले ने कहा कि वारकरी संप्रदाय के माध्यम से सम्पूर्ण मानवता का कल्याण संभव है – बशर्ते हम संतों द्वारा दिखाए मार्ग का अनुसरण करें।

 

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