मुंबई

धारावी पुनर्विकास परियोजना पर बसपा का तीव्र विरोध

धारावी पुनर्विकास परियोजना पर बसपा का तीव्र विरोध

प्रदेशाध्यक्ष सुनील डोंगरे ने सरकार और अदाणी समूह को घेरा, कहा– आम नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन न करें

 

मुंबई: ब्यूरो विशाल समाचार 

 

धारावी पुनर्विकास परियोजना के नाम पर सरकार और अदाणी समूह धारावी के गरीबों के मूलभूत अधिकारों का हनन कर रहे हैं। यह परियोजना जनसामान्य के अधिकारों का उल्लंघन है और लोकतांत्रिक मूल्यों व जनता के स्वास्थ्य के लिए खतरा है। यह तीखी प्रतिक्रिया बहुजन समाज पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष एडवोकेट सुनील डोंगरे ने सोमवार (7 जुलाई) को मुंबई में आयोजित पत्रकार परिषद के माध्यम से दी।

 

इस मौके पर राज्य महासचिव व पश्चिम महाराष्ट्र के प्रभारी तथा पुणे के पूर्व नगरसेवक डॉ. हुलगेश चलवादी सहित बसपा के प्रमुख पदाधिकारी उपस्थित थे। साथ ही पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने धारावी पुनर्विकास परियोजना के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एस.वी.आर श्रीनिवास को ज्ञापन सौंपकर धारावी की समस्याओं से अवगत कराया।

इस दौरान प्रदेश सचिव नागसेन माला, इंजीनियर दादाराव उईके, एड. शिरसाठ और उत्तर भारतीय भाईचारा, पुणे के अध्यक्ष अनिल त्रिपाठी भी उपस्थित थे।

 

एड. डोंगरे ने आरोप लगाया कि धारावी से लोगों को जबरन हटाकर उन्हें देवनार डंपिंग ग्राउंड के पास बसाने की योजना बनाई जा रही है, जो सीधे तौर पर अवैध है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियमानुसार, डंपिंग ग्राउंड से 500 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य करना गैरकानूनी है। ऐसे विषाक्त वातावरण में लोगों को पुनर्वसित करना उनके जीवन के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने चेतावनी दी कि धारावी की आर्थिक, सामाजिक व सांस्कृतिक विविधता को नष्ट कर इस क्षेत्र को ‘बीकेसी-2’ बनाने की व्यापारिक मंशा सरकार और कॉर्पोरेट समूह की है।

 

उन्होंने कहा, “अदाणी समूह कोई समाजसेवी संस्था नहीं बल्कि व्यावसायिक हितों से काम कर रहा है। धारावी के लोगों ने वर्षों तक मुंबई की अर्थव्यवस्था को सहारा दिया है। उन्हें घर देना सरकार की कृपा नहीं, बल्कि कानूनी व सामाजिक जिम्मेदारी है।”

लघु उद्योगों का क्या?

डोंगरे ने कहा कि इस परियोजना के प्रस्ताव में केवल आवासीय पुनर्वास की बात है, धारावी के हज़ारों लघु उद्योगों के बारे में कुछ नहीं कहा गया है। विशेष रूप से चमड़ा, वस्त्र निर्माण, खाद्य प्रसंस्करण, और मृत्तिका शिल्प जैसे उद्योग हजारों लोगों की आजीविका का स्रोत हैं। यदि इन उद्योगों का पुनर्वास नहीं किया गया, तो लोगों को रोजगारविहीन घर मिलेंगे और इससे और भी गंभीर समस्याएं उत्पन्न होंगी।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस परियोजना में पारदर्शिता का अभाव है और आम नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संस्थाओं को इसकी पूरी जानकारी नहीं दी गई है। पात्रता के मापदंड, वित्तीय लेनदेन और पुनर्वास की शर्तें सभी अस्पष्ट हैं। यह ‘टॉप-डाउन’ दृष्टिकोण लोकतंत्र विरोधी है।

सरकारी ज़मीनों के निजीकरण की साज़िश – डॉ. चलवादी

 

इस अवसर पर प्रदेश महासचिव डॉ. हुलगेश चलवादी ने कहा कि धारावी की 60% से अधिक ज़मीन सार्वजनिक स्वामित्व की है, जिसे निजी कंपनियों को बेचना जनता की संपत्ति के निजीकरण के समान है।

उन्होंने सरकार से मांग की कि धारावी के सभी निवासियों को पात्र मानते हुए उन्हें उन्हीं की मूल भूमि पर घर दिया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी प्रकार की “छूट” के नाम पर वंचितों का अपमान नहीं होना चाहिए। बसपा हमेशा शोषितों, वंचितों और मेहनतकश वर्ग के साथ खड़ी रही है और उनके अधिकारों के लिए संघर्ष करती रहेगी।

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