
दिव्यांग बच्चों के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की अनोखी पहल: घर तक पहुंचेगी चिकित्सा जांच सेवा :-प्रमुख जिला एवं सत्र न्यायाधीश महेंद्र के. महाजन
पुणे : दिव्यांग बच्चों की चिकित्सा जांच अब घर पर ही उपलब्ध कराई जाएगी। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से यह सेवा उन दिव्यांग बच्चों को प्रदान की जाएगी जो शारीरिक अक्षमता के कारण शिविरों तक पहुंचने में असमर्थ हैं। इसके लिए संबंधित परिजनों से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से संपर्क करने की अपील प्रमुख जिला एवं सत्र न्यायाधीश महेंद्र के. महाजन ने की।
यह जानकारी उन्होंने बाल कल्याण संस्था, गणेशखिंड, पुणे में आयोजित विशेष दिव्यांग सशक्तीकरण शिविर के उद्घाटन अवसर पर दी। यह शिविर उच्च न्यायालय की किशोर न्याय समिति एवं महाराष्ट्र राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मार्गदर्शन में शुक्रवार, 28 जून को आयोजित किया गया।
इस अवसर पर प्राधिकरण की सचिव सोनल पाटील, दिव्यांग आयुक्तालय के आयुक्त प्रवीण पुरी, बाल कल्याण संस्था के अध्यक्ष पद्मश्री प्रतापराव पवार, दिव्यांग भवन (पिंपरी-चिंचवड) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी परेश गांधी, एवं सहायक आयुक्त संगीता डावखर उपस्थित थे।
हर दिव्यांग बालक को समान अवसर मिलना चाहिए:
न्यायाधीश श्री महाजन ने कहा कि दिव्यांग बच्चों को उनकी शारीरिक क्षमता की परवाह किए बिना सीखने और आगे बढ़ने का समान अवसर मिलना चाहिए। दिव्यांगों का समावेशन उनका अधिकार है, और यह हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है कि कोई भी बच्चा उपेक्षित न रहे। यह शिविर केवल सेवा देने के लिए नहीं, बल्कि समावेशी एवं न्यायपूर्ण समाज की दिशा में एक सशक्त कदम है।
सामूहिक प्रयास से सशक्तिकरण संभव:
प्राधिकरण की सचिव सोनल पाटील ने कहा कि दिव्यांगों का समाज के हर क्षेत्र में समावेश कर उन्हें सशक्त बनाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। इस शिविर के माध्यम से न्याय व्यवस्था, प्रशासन, चिकित्सा सेवाएं और स्वयंसेवी संस्थाएं एक मंच पर आकर दिव्यांग बच्चों के हित में एक प्रभावी पहल कर रही हैं।
500 से अधिक लाभार्थियों को मिला लाभ:
इस शिविर में 100 से अधिक दिव्यांग बच्चों की चिकित्सा जांच कर प्रमाणपत्र वितरित किए गए और 500 से अधिक लाभार्थियों को विभिन्न कानूनी, चिकित्सा और कल्याणकारी सेवाएं प्रदान की गईं।सेवाओं में शामिल रहीं:समुपदेशन
आधार कार्ड पंजीकरण
निशुल्क कानूनी सलाह
कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी
शासकीय कर्मचारियों के दिव्यांग बच्चों के लिए पेंशन एवं छात्रवृत्ति योजनाए।
राष्ट्रीय मुक्त विद्यापीठ संबंधी मार्गदर्शन आदि
मेडिकल टीमों द्वारा विस्तृत जांच:
औंध जिला अस्पताल एवं यशवंतराव चव्हाण स्मृति अस्पताल, पिंपरी की टीमों द्वारा नेत्र, श्रवण, बौद्धिक, मानसिक, न्यूरोलॉजिकल, ऑटिज़्म, पार्किंसन, मस्क्युलर डिस्ट्रॉफी, थैलेसीमिया, हिमोफीलिया, सिकल सेल एनीमिया, अम्ल हमला पीड़ित, बौनेपन, मल्टीपल डिसएबिलिटी आदि स्थितियों की जांच की गई।
स्वयंसेवी संस्थाओं का योगदान:
शिविर में बाल कल्याण संस्था, एक्शन फॉर इम्पैक्ट फाउंडेशन, एकांश ट्रस्ट, सप्तऋषी फाउंडेशन, जैन डिवाइन ग्रुप आदि संस्थाओं ने सक्रिय सहभाग किया। इनमें आधार कार्ड पंजीकरण, व्हीलचेयर एवं स्कूल बैग वितरण जैसी सेवाएं दी गईं।
उपस्थित प्रमुख प्रतिनिधियों में प्रतीक इंगळे, अनिता अय्यर, संकेत शाह आदि सम्मिलित थे।


