रीवा

आपातकाल के 50 वर्ष पूरे होने के कार्यक्रम वर्ष भर आयोजित होंगे – संयुक्त कलेक्टर

आपातकाल के 50 वर्ष पूरे होने के कार्यक्रम वर्ष भर आयोजित होंगे – संयुक्त कलेक्टर

 

रीवा आलोक कुमार तिवारी आपातकाल के 50 वर्ष पूरे होने पर भारत सरकार के निर्देशों के अनुसार जिले भर में 25 जून को संविधान हत्या दिवस के रूप में मनाया गया। इस संबंध में शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय मार्तण्ड क्रमांक एक के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षकों और विद्यार्थियों को आपातकाल से जुड़ी लघु फिल्म दिखाई गई। कार्यक्रम में संयुक्त कलेक्टर पीके पाण्डेय ने कहा कि भारत सरकार की अधिसूचना के अनुसार 25 जून को संविधान हत्या दिवस के रूप में अधिसूचित किया गया है। सरकार के संस्कृति विभाग के निर्देशों के अनुसार 25 जून 2025 से लेकर 25 जून 2026 तक आपातकाल तथा संविधान की हत्या से जुड़े जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। आज ही नई दिल्ली में कर्तव्य पथ से जागरूकता के लिए 6 मशालें देश के भ्रमण के लिए रवाना हो रही हैं। सभी राज्यों के प्रमुख शहरों में इनका भ्रमण होगा। विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से आमजनता को 1975 में लगाए गए आपातकाल के संबंध में जानकारी दी जाएगी। शिक्षण संस्थाओं में निबंध प्रतियोगिता, भाषण प्रतियोगिता, नारा लेखन तथा फोटो प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों को इस संबंध में जागरूक किया जाएगा।

 

संयुक्त कलेक्टर ने कहा कि हमारा संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है। यह देश की न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका के गठन तथा संचालन का आधार है। संविधान के आधार पर ही देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था स्थापित हुई है। संविधान में आमजनता को विभिन्न तरह की स्वतंत्रता, मौलिक अधिकार और कर्तव्यों का विस्तार से उल्लेख है। आमजनता के मूल अधिकारों की रक्षा संविधान में निहित है। कार्यक्रम में उप संचालक शिक्षा केपी तिवारी ने कहा कि 1975 में तत्कालीन सरकार ने नागरिकों के मूल अधिकारों और अभिव्यक्त की आजादी को निलंबित कर दिया था। लाखों निरपराध लोगों पर बिना मुकदमा चलाए जेलों में बंद रखा गया। रीवा में आपातकाल का विरोध करते हुए सैकड़ों व्यक्ति जेल गए। कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत करते हुए विद्यालय के प्राचार्य श्री जायसवाल ने कार्यक्रम के उद्देश्यों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आपातकाल को 50 वर्ष पूरे हो गए हैं। युवाओं और बच्चों को आपातकाल के संबंध में पूरी जानकारी रखनी चाहिए। मौलिक अधिकारों के हनन और प्रेस की आजादी छीनने से जो अराजकता उत्पन्न हुई उसके संबंध में युवाओं को अध्ययन करना चाहिए। कार्यक्रम में एसके स्कूल के प्राचार्य मिथिलेश गहरवार, सहायक संचालक शिक्षा राजेश मिश्रा, विद्यालय के शिक्षक तथा विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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