
चश्मे से छुटकारा पाने के लिए एचव्ही देसाई आय हॉस्पिटल में सबसे उन्नत प्रणाली कार्यान्वित
महाराष्ट्र में इस तरह का पहला उपकरण
पुणे( डीएस तोमर): लेझर आय शस्त्रक्रिया तकनीक में एक बड़ा कदम आगे बढ़ाते हुए पीबीएमए के एचव्ही देसाई आय हॉस्पिटल में सबसे तेज और सबसे उन्नत ब्लेडलेस लेजर प्रणाली (व्हिझ्युमॅक्स 800 फेम्टोसेकंड लेझर सिस्टिम बाय झाईस) कार्यान्वित की गई है . यह महाराष्ट्र में इस प्रकार की पहली प्रणाली है, यह जानकारी एचव्ही देसाई आय हॉस्पिटल के वरिष्ठ नेत्र शल्यचिकित्सक डॉ.मुकेश परियाणी,डॉ.वर्षा पुराणिक और डॉ.संकेत कुलकर्णी इन्होने पत्रकार परिषद में दी. इस दौरान एचव्ही देसाई आय हॉस्पिटल के कार्यकारी संचालक परवेझ बिलिमोरिया और मुख्य वैद्यकीय संचालक डॉ.राहुल देशपांडे उपस्थित थे.
इसके बारे में जानकारी देते हुए वरिष्ठ नेत्र शल्यचिकित्सक डॉ.मुकेश परियाणी ने कहा की, चश्मे से छुटकारा पाना यह कई व्यक्तिगत और व्यावसायिक कार्यों के लिए आवश्यक हो गया है. यह सिर्फ सुंदरता का मामला नहीं है. खेल जैसे कई क्षेत्रों में यह एक आवश्यकता बन गई है, जहां चश्मे से मुक्ति से कामगिरी , सुरक्षा और आत्मविश्वास पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. अपने चश्मे या कॉन्टैक्ट लेंस से छुटकारा पाने का एक विकल्प लेजर प्रक्रिया है जिसे रिफ्रेक्टिव सर्जरी कहा जाता है. इस प्रकार में एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया स्माईल (स्मॉल इन्सिजन लेंटिक्युल एक्स्ट्रॅक्शन) है. इसका उपयोग आंख के कॉर्निया के आकार को बदलने के लिए किया जाता है,इससे प्रकाश की किरणें कॉर्निया पर केन्द्रित हो जाती हैं और अपवर्तन त्रुटि (रिफ्रॅक्टीव्ह एरर) समाप्त हो जाती है. इस नए तंत्रज्ञान में अति जलद फेम्टोसेकंड लेझर पल्सेस (लेजर द्वारा उत्पादित प्रकाश की छोटी छाया) शामिल हैं,इसके कारण कॉर्निया के ऊतक का डिस्क के आकार का टुकड़ा निकाल दिया जाता है. यह जलद एवं सुरक्षित है तथा रिफ्रॅक्टीव्ह सर्जरी में एक महत्वपूर्ण कदम है.


