
मराठी भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध : मराठी भाषा मंत्री उदय सामंत
पुणे:मराठी भाषा का संरक्षण और संवर्धन कर अगली पीढ़ी तक मराठी का ज्ञान पहुंचाना अत्यंत आवश्यक है। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार वैश्विक स्तर पर मराठी भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए लगातार प्रयासरत है। यह बात महाराष्ट्र के मराठी भाषा मंत्री उदय सामंत ने कही। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि मराठी भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए कार्यरत व्यक्तियों और संस्थाओं को राज्य सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग दिया जाएगा।
उदय सामंत अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन उद्यान के भूमिपूजन समारोह में बोल रहे थे, जो गुजर-निंबाळकरवाड़ी में आयोजित किया गया था। इस अवसर पर सरहद संस्था के संजय नहार, अखिल भारतीय मराठी साहित्य महामंडल के अध्यक्ष प्रो. मिलिंद जोशी, संजय पगारिया, अनुज नहार, यशपाल जवळगे सहित कई साहित्य प्रेमी उपस्थित थे।
मंत्री सामंत ने कहा कि दिल्ली में हुए अखिल भारतीय साहित्य सम्मेलन में कई सकारात्मक पहल हुईं, जिससे सांस्कृतिक और साहित्यिक ऊर्जा मिली। सरहद संस्था समाजोपयोगी संकल्पनाओं को सफलतापूर्वक साकार कर समाज को नई दिशा दे रही है। संजय नहार की संकल्पना से यह उद्यान साकार हो रहा है, और देश का पहला साहित्य दालन खुलने जा रहा है।
उन्होंने कहा कि मराठी भाषा का संरक्षण, प्रचार, प्रसार और संवर्धन होना चाहिए। ऐसे कार्यक्रमों से मराठी भाषा और साहित्य को नई ऊर्जा मिलती है। मराठी भाषा को ‘अभिजात भाषा’ का दर्जा मिला है, जिसमें 750 वर्ष पुरानी ‘ज्ञानेश्वरी’ ग्रंथ का बड़ा योगदान है। आळंदी देवस्थान द्वारा ज्ञानेश्वरी ग्रंथ की छपाई के लिए मांगे गए 1 करोड़ रुपये की निधि 48 घंटे के भीतर उपलब्ध कराई गई है।
मंत्री सामंत ने यह भी अपील की कि मराठी भाषा के लिए अंग्रेजी के विकल्प स्वरूप शब्द निर्माण की मुहिम चलाई जानी चाहिए।
इस अवसर पर संजय नहार ने कहा कि साहित्य सम्मेलन केवल एक कार्यक्रम न रहे, बल्कि जनसहभागिता से साहित्य के प्रचार-प्रसार की एक व्यापक मुहिम बने। सम्मेलन के पूर्व अध्यक्षों की पहचान और योगदान अगली पीढ़ी तक पहुंचे, इसी भावना से यह उद्यान स्थापित किया जा रहा है।


