
दुनिया युद्ध में नहीं बुद्ध में समाधान ढूंढ सकती डॉ. विश्वनाथ दा. कराड के विचार
एमआईटी डब्ल्यूपीयू में बुद्ध पूर्णिमा उत्साह के साथ मनाई
पुणे (विशाल समाचार): दुनिया को युद्ध में नहीं, बल्कि बुद्ध में समाधान मिल सकता है. दुनिया को बुद्ध की शिक्षाओं से सीख लेनी चाहिए और शांति के मार्ग पर चलना चाहिए. इस अस्थिर पृथ्वी पर भगवान गौतम बुद्ध के ज्ञान के मार्ग पर चलकर जीवन को समृद्ध बनाया जा सकता है. ये विचार एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के संस्थापक अध्यक्ष प्रो. डॉ. विश्वनाथ दा. कराड ने व्यक्त किए.
एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी में तथागत भगवान गौतम बुद्ध पूर्णिमा बडे उत्साह के साथ मनाई गई. इस अवसर पर कवि डॉ. संजय उपाध्ये, नागपुर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. एस.एम.पठाण, एमआईटी डब्ल्यूपीयू के कुलपति डॉ. आर.एम.चिटणीस, दूरदर्शन के पूर्व निदेशक डॉ. मुकेश शर्मा, माइर्स एमआईटी के कुलपति प्रो.डॉ. रत्नदीप जोशी, डब्ल्यूपीयू के रजिस्ट्रार प्रो. गणेश पोकले, प्रो.डॉ. दत्ता दंडगे, प्रो.विक्रांत गायकवाड और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर विश्वविद्यालय के अध्ययन प्रमुख प्रो.डॉ. विनोद कुमार जाधव उपस्थित थे.
प्रो.डॉ. विश्वनाथ दा. कराड ने कहा, भगवान गौतम बुद्ध का पंचशील तत्व और संत श्री ज्ञानेश्वर माऊली का पसायदान पूरे विश्व को शांति का मार्ग दिखा सकता है. बुद्ध ने विश्व धर्म, मानव कल्याण और जाति भेद की दीवारों के पार पूरी मानवता को एकजुट करने के लिए काम किया है. भारत पूरी दुनिया में भगवान बुद्ध और महात्मा गांधी के लिए जाना जाता है.
डॉ. आर.एम.चिटणीस ने कहा, भगवान बुद्ध ने दुनिया को शांति और अहिंसा का संदेश दिया. दुनिया को सत्य, शांति और मानवता का संदेश देने वाले बुद्ध के पंच उपदेश मानव जीवन को सही दिशा देंगे.

डॉ. एस.एन.पठाण ने कहा, मौजूदा समय में पूरे देश को बुद्ध के विचारों की जरूरत है. इस धर्म में सभी धर्मों के सिद्धांत और विचारधारा शामिल है. पाप और पुण्य का विचार त्याग कर पुण्य का आचरण करना चाहिए.
प्रो. दत्ता दंडगे ने कहा, बौद्ध धर्म की स्थापना २५०० वर्ष पूर्व हुई थी और भगवान बुद्ध के विचार आज भी जीवित हैं. इस धर्म की उत्पत्ति पूर्ण संतुष्टि से हुई है. ज्ञान से करुणा उत्पन्न होती है और उस करुणा को कर्म में दिखना चाहिए.
इसके बाद डॉ. संजय उपाध्ये, डॉ. मुकेश शर्मा, प्रो. गणेश पोकले और प्रो. विक्रांत गायकवाड ने भगवान गौतम बुद्ध के विचारों को साझा किया और उनसे सीख लेने को कहा.
प्रो.डॉ. विनोद कुमार जाधव ने कार्यक्रम का संचालन किया. इसके अलावा प्रो. डॉ. विक्रांत गायकवाड ने आभार माना.


